मंगलवार, मई 23, 2006
बुधवार, मई 17, 2006
यह तो कमाल हो गया
इस जगह हमारे देश में यह घटना हुई होती तो त्याग के नाम पर और उनके चमचे चीख चीख कर देश को सर उठा लेते तथा समारोह कर करोड़ों रुपये खर्च दिये जाते
श्री खाई अभी मात्र ७३ वर्ष के है जो भारतीय राजनीती के हिसाब से काफ़ी युवा हैं। कहाँ हमारे बुढ्ढे नेता जिनके पाँव कब्र में लटके रहते हैं फ़िर भी नेतागिरी या पद का मोह नही छोड़ पाते।
विश्वास नहीं होता;
डेक्कन क्रानिकल, हैदराबाद १६-०५-२००६
में छपी यह तस्वीर देख लें।

सोमवार, मई 15, 2006
चिठ्ठाकार मित्रों को धन्यवाद
रविवार, मई 14, 2006
अम्मा एक कथा गीत
थोड़ी थोड़ी सी धूप निकलती थोड़ी बदली छाई है
दूर गांव से आई थी वह दादा कहते बच्ची है
हंसती थी तो घर में घी के दीए जलते थे
बड़े भागते वह तीखे दिन वह धीमी शांत बहा करती थी
मां पर लिखी कुछ और कवितायें :
शनिवार, मई 13, 2006
गिनेस बुक में दाखिल अब तक का सबसे बेहतरीन रिकॉर्ड
फ़िलीपींस की राजधानी मनीला में पिछले गुरूवार को एक बेहतरीन रिकॉर्ड बनाने के लिये ३७३८ महिलाओं ने एक जगह एकत्रित हो कर अपने बच्चों को स्तनपान करवाया। यहाँ प्रकाशित लेख के अनुसार फ़िलिपींस में मात्र १६% महिलायें ही अपने बच्चों को स्तनपान करवाती हैं। महिलाओं के इस अभियान से वाकई अगर स्तनपान के प्रति जागृति आती है तो यह अभियान सफ़ल माना जाना चाहिये। मेरे हिसाब से गिनेस बुक में अब तक दाखिल किये गये सबसे बेहतरीन रिकॉर्ड में से यह एक है।
नीचे मेरी पसन्द

बुधवार, मई 10, 2006
चित्र पहेल-४ का हल- लिवींग स्टोन "लिथोप्स"
जी हाँ यह केक्टस तो नहीं परन्तु यह एक पौधा जरूर है। पत्थर की भांति दिखने वाला यह पौधा दक्षिण अफ़्रीका में बहुतायत रूप से पाया जाता है। इस पौधे का नाम है "लिथोप्स"।
ग्रीक भाषा के "लिथो" यानि पत्थर और "आप्स" यानि "कि तरह दिखने वाला"। दो आपस में जुड़े पत्ते वाला यह पौधा रेगिस्तानी इलाकों में पाया जाता है, इस वजह से इसको पानी की आवश्यकता बहुत कम होती है। पहेली में दिखाये गये चित्र की भांति इस के पत्तों पर तरह तरह की डिजायन बनी हुई होती है; जो देखने में बहुत सुन्दर होती है, मानो रंग बिरंगे जवाहरात बिखरे पड़े हों और इसी वजह से इसे "लीवींग स्टोन " भी कहा जाता है। पत्थर की भांति दिखने की वजह से यह जीव जन्तुओं से बचा रहता है और इसी वजह से इस पौधे की उम्र ९० से लेकर १०० साल तक पाई जाती है। नवंबर से मार्च तक इन पौधों पर रंग बिरंगे और खुशबुदार फ़ूल लगते हैं





मंगलवार, मई 09, 2006
चित्र पहेली - 4

शनिवार, मई 06, 2006
रजनीश मंगला जी कि टिप्पणी के बारे में एक सवाल
शुक्रवार, मई 05, 2006
आज का सबसे दुखद समाचार
अब भी साज़-ए-दिल में तराने बहुत हैं
अब भी जीने के बहाने बहुत हैं
गैर घर भीख ना मांगो फ़न की
जब अपने ही घर में खजाने बहुत हैं
है दिन बद-मज़ाकी के "नौशाद" लेकिन
अब भी तेरे फ़न के दीवाने बहुत हैं.
स्व. नौशाद साहब को हार्दिक श्रद्धान्जली, अल्लाह उनकी रूह को सुकुन फ़रमाये
विश्व के सबसे क्रूर जल्लाद एडॉल्फ़ आईकमान की कहानी
द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी की पराजय और हिटलर के आत्महत्या कर लेने के बाद हिटलर की सेना के सारे जिन्दा बचे बड़े अधिकारी, जर्मनी से भाग गये। उनमें से एक अधिकारी एडॉल्फ़ आईकमान जो कि खास यहुदी जनता को सजा देने के लिये बनायी गयी खास टुकड़ी और गेस्टापो का मुखिया था, और जिसने विश्व युद्ध के दौराने मारे गये ६० लाख यहुदियों में से लगभग ५० लाख यहुदियों (जिनमें बच्चे और महिलायें भी थी) को तो खुद आइकमान ने अपने मार्गदर्शन और अपने सामने मरवाया था।
एसा क्रूर पशु समान इंसान जर्मनी की पराजय के बाद जरमनी से अपनी सारी पहचान मिटा कर भाग कर अर्जेन्टीना में जा छुपा और अर्जेन्टीआ में आईकमान रिकार्डो क्लेमेंट के नाम से रहने और मर्सेडीज बेन्ज़ में एक मामुली मज़दूर का काम करने लगा।
इस्रायल उसे भूला नहीं था और उसे उस के किये कर्मों की सजा देने के लिये मचल रहा था । परन्तु आइकमान शायद भूल गया था कि उस का पाला इस्रायल की जासूसी संस्था मोसाद के शातिर जासूसों से पड़ने वाला है। किस तरह मोसाद के प्रमुख इसर हेरेल ने इस्रायल से हज़ारों किलोमीटर दूर अर्जेन्टीना से उसे इस्रायल ला कर ( अपहरण कर) आईकमान को उसके अपराधों की सजा दिलवायी, बहुत जबरदस्त कहानी है अगर आप एसे वाकई पढ़ना चाहते हैं तो यहाँ, यहाँ और यहाँ देखें पल पल आश्चर्य में डाल देने वाली और मोसाद के जासूसों को चुनौती देने वाली कहानी।यहाँ मोसाद के प्रमुख इसर हेरेल के किताब दी हाऊस ओन गेरीबाल्डी स्ट्रीट यहाँ देखिये।
पॉल पॉट के बारे में फ़िर कभी.....!!