Subscribe

RSS Feed (xml)

Powered By

Skin Design:
Free Blogger Skins

Powered by Blogger

सोमवार, अप्रैल 24, 2006

चित्र पहेली-२ का हल: रामप्पा मंदिर


आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार पानी में वही वस्तु तैर सकती हे जो अपने वजन जितना पानी हटाये. तो क्या पानी में पत्थर तैर सकता है? नहीं !! क्यों कि पत्थर द्वारा हटाये गये पानी से पत्थर का वजन कई गुना ज्यादा होता है सो वह पानी में डूब जायेगा.
आप सोच रहे होंगे कि मंदिर कि बात में यह आर्किमिडीज का सिद्धांत कहाँ आ गया ? मंदिर और इस सिद्धांत का क्या लेना देना परन्तु शायद नहीं मानेंगे कि इस मंदिर ने आर्किमिडीज के सिद्धांत को गलत साबित कर दिया है. चलिये पूरी बात बताते है.
इस्वी सन १२१३ में वरंगल के काकतिया वंश के महाराजा गणपति देव को एक शिव मंदिर बनाने का विचार आया. उन्होनें अपने शिल्पकार रामप्पा को एसा मंदिर बनाने को कहा जो वर्षों तक टिका रहे. रामप्पा ने की अथक मेहनत और शिल्प कौशल ने आखिरकार मंदिर तैयार कर दिया. जो दिखने में बहुत ही खुबसुरत था, राजा बहुत प्रसन्न हुए और मंदिर का नाम उन्होने उसी शिल्पी के ही नाम पर रख दिया " रामप्पा मंदिर" यह शायद विश्व का एक मात्र मंदिर हे जिसका नाम भगवान के नाम ना होकर उसके शिल्पी के नाम पर है.
कुछ वर्षों पहले लोगो को ध्यान में आया कि यह मंदिर इतना पुराना है फ़िर भी यह टूटता क्यों नहीं जब कि इस के बाद में बने मंदिर खंडहर हो चुके है. यह बात पुरातत्व वैज्ञानिकों के कान में पड़ी तो उन्होने पालमपेट जा कर मंदिर कि जाँच की तो पाया कि मंदिर वाकई अपनी उम्र के हिसाब से बहुत मजबूत है. काफ़ी कोशिशों के बाद भी विशेषज्ञ यह पता नहीं लगा सके कि उसकी मज़बूती का रहस्य क्या है, फ़िर उन्होनें मंदिर के पत्थर के एक टुकड़े को काटा तो पाया कि पत्थर वजन में बहुत हल्का हे, उन्होने पत्थर के उस टुकड़े को पानी में डाला तो वह टुकड़ा पानी में तैरने लगा यानि यहाँ आर्किमिडिज का सिद्धांत गलत साबित हो गया. तब जाकर मंदिर की मज़बूती का रहस्य पता लगा कि और सारे मंदिर तो अपने पत्थरों के वजन की वजह से टूट गये थे पर रामप्पा मंदिर के पत्थरों में तो वजन बहुत कम हे इस वजह से मंदिर टूटता नहीं.
अब तक वैज्ञानिक उस पत्थर का रहस्य पता नहीं कर सके कि रामप्पा यह पत्थर लाये कहाँ से क्यों कि इस तरह के पत्थर विश्व में कहीं नहीं पाये जाते जो पानी में तैरते हों. तो फ़िर क्या रामप्पा ने 800 वर्ष पहले ये पत्थर खुद बनाये? अगर हाँ तो वो कौन सी तकनीक थी उनके पास!! वो भी 800-900 वर्ष पहले!!!!!
रामप्पा या राम लिंगेश्वर मंदिर आन्ध्र प्रदेश के वरंगल से 70कि. मी दूर पालम पेट में स्थित है. यह मंदिर 6 फ़ीट ऊँचे मंच ( प्लेट फ़ार्म) पर बना हुआ है,इस मंदिर के बारे में ज्यादा जानकारी यहाँ मिल सकती है.

6 टिप्‍पणियां:

Pankaj Bengani ने कहा…

भाई सागर बहुत बढिया.
अमूल्य जानकारी के लिए बहुत धन्यवाद

राम चन्द्र मिश्र ने कहा…

सागर जी,
काफ़ी कुछ ठीक बताया है आपने फ़िर भी,
आप ऐसा क्यों कह रहे हैं कि "इसने आर्किमिडीज के सिद्धान्त को गलत साबित कर दिया है।"
गलत तो तब होता जब
"कोई वस्तु किसी द्रव में अपने द्वारा हटाये गये उसी द्रव के भार से अधिक होकर भी तैरती रहे",
है कि नहीं?

संजय बेंगाणी ने कहा…

पत्थर का वजन आपने बताया उस हिसाब से कम हैं और वह पानी में इस लिए तैरता हैं की उसके द्वारा हटाये गये पानी का वजन उसके वजन से ज्यादा हैं. मित्र विज्ञान में किंतु-परंतु का स्थान नहीं होता ज्योतिष्य कि तरह.
लगता हैं पत्थर कि बनावट में हवा घुली हुई हैं, कुछ कुछ वैसे ही जैसे आइस्क्रिम में होती हैं, इस लिए वह सामन्य पत्थर से हल्के हैं.

Udan Tashtari ने कहा…

सागर भाई

सुंदर जानकारी के लिये बहुत धन्यवाद।

समीर लाल

बेनामी ने कहा…

I�m sure these mom phone sex Olympics will feel a lot different.
There is not only more pressure on us as a team but more pressure individually. mom phone sex

बेनामी ने कहा…

This is really a lovely horse and I speak from personal latina phone sex experience
since I once mounted her mother. latina phone sex